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ramayan 2.99.24: श्री रामजी के उस धाम में भरतजी ने एक विशाल एवं पवित्र वेदी भी देखी, जो ईशान कोण की ओर थोड़ी नीचे थी और उस पर अग्नि जल रही थी॥ 24॥   |   ramayan सर्ग 2.99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.99.24 
प्रागुदक्प्रवणां वेदिं विशालां दीप्तपावकाम्।
ददर्श भरतस्तत्र पुण्यां रामनिवेशने॥ २४॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी के उस धाम में भरतजी ने एक विशाल एवं पवित्र वेदी भी देखी, जो ईशान कोण की ओर थोड़ी नीचे थी और उस पर अग्नि जल रही थी॥ 24॥
 
In that abode of Shri Ram, Bharata also saw a huge and sacred altar which was slightly lower towards the northeast. Fire was burning on it.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)