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ramayan 2.99.14: तत्पश्चात् रघुकुल के रत्न भरत दो घड़ी में मंदाकिनी के तट पर स्थित चित्रकूट पहुँचे और अपने साथियों से इस प्रकार बोले -   |   ramayan सर्ग 2.99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 99: भरत का शत्रुघ्न आदि के साथ श्रीराम के आश्रम पर जाना, उनकी पर्णशाला देख रोते-रोते चरणों में गिरना, श्रीराम का उन सबको हृदय से लगाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.99.14 
अथ गत्वा मुहूर्तं तु चित्रकूटं स राघव:।
मन्दाकिनीमनुप्राप्तस्तं जनं चेदमब्रवीत्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रघुकुल के रत्न भरत दो घड़ी में मंदाकिनी के तट पर स्थित चित्रकूट पहुँचे और अपने साथियों से इस प्रकार बोले -
 
Thereafter, Bharat, the jewel of the Raghukul, reached Chitrakoot situated on the banks of the Mandakini in two hours and spoke to his companions as follows -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)