श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 98: भरत के द्वारा श्रीराम के आश्रम की खोज का प्रबन्ध तथा उन्हें आश्रम का दर्शन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.98.6 
यावन्न रामं द्रक्ष्यामि लक्ष्मणं वा महाबलम्।
वैदेहीं वा महाभागां न मे शान्तिर्भविष्यति॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'जब तक मैं श्री राम, पराक्रमी लक्ष्मण या पराक्रमी विदेह राजकुमारी सीता को न देख लूँ, तब तक मुझे शांति नहीं मिलेगी। 6॥
 
'I will not find peace until I see Shri Ram, the mighty Lakshman or the mighty Videha princess Sita. 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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