श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 98: भरत के द्वारा श्रीराम के आश्रम की खोज का प्रबन्ध तथा उन्हें आश्रम का दर्शन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.98.5 
अमात्यै: सह पौरैश्च गुरुभिश्च द्विजातिभि:।
सह सर्वं चरिष्यामि पद‍्भ्यां परिवृत: स्वयम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'मैं स्वयं अपने मन्त्रियों, नागरिकों, ज्येष्ठों और ब्राह्मणों के साथ उन सबसे घिरा हुआ पैदल ही सम्पूर्ण वन में विचरण करूँगा।॥5॥
 
'I myself, along with my ministers, citizens, elders and Brahmins, will wander about the entire forest on foot, surrounded by all of them.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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