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ramayan 2.98.3: सौम्य! तुम बहुत से मनुष्यों और इन निषादों को साथ लेकर शीघ्र ही इस वन में चारों ओर श्री रामचन्द्रजी की खोज करो॥ 3॥   |   ramayan सर्ग 2.98: भरत के द्वारा श्रीराम के आश्रम की खोज का प्रबन्ध तथा उन्हें आश्रम का दर्शन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.98.3 
क्षिप्रं वनमिदं सौम्य नरसंघै: समन्तत:।
लुब्धैश्च सहितैरेभिस्त्वमन्वेषितुमर्हसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! तुम बहुत से मनुष्यों और इन निषादों को साथ लेकर शीघ्र ही इस वन में चारों ओर श्री रामचन्द्रजी की खोज करो॥ 3॥
 
'Soumya! Taking along with you many men and these Nishads you should quickly search for Sri Ramachandraji all around this forest.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)