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ramayan 2.98.18: इस प्रकार चित्रकूट पर्वत पर पुण्यात्मा ऋषियों सहित श्री रामजी का आश्रम देखकर महात्मा भरत ने उनकी खोज में आई हुई सेना को अपने पूर्व स्थान पर रुकने का आदेश दिया और स्वयं गुह सहित शीघ्रतापूर्वक आश्रम की ओर चल पड़े॥ 18॥   |   ramayan सर्ग 2.98: भरत के द्वारा श्रीराम के आश्रम की खोज का प्रबन्ध तथा उन्हें आश्रम का दर्शन   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 98: भरत के द्वारा श्रीराम के आश्रम की खोज का प्रबन्ध तथा उन्हें आश्रम का दर्शन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.98.18 
स चित्रकूटे तु गिरौ निशम्य
रामाश्रमं पुण्यजनोपपन्नम्।
गुहेन सार्धं त्वरितो जगाम
पुनर्निवेश्यैव चमूं महात्मा॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार चित्रकूट पर्वत पर पुण्यात्मा ऋषियों सहित श्री रामजी का आश्रम देखकर महात्मा भरत ने उनकी खोज में आई हुई सेना को अपने पूर्व स्थान पर रुकने का आदेश दिया और स्वयं गुह सहित शीघ्रतापूर्वक आश्रम की ओर चल पड़े॥ 18॥
 
Having thus seen the hermitage of Sri Rama along with pious sages on the Chitrakoot mountain, Mahatma Bharata ordered the army that had come to search for him to halt at its previous place and himself, along with Guha, quickly proceeded towards the hermitage.॥ 18॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डेऽष्टनवतितम: सर्ग:॥ ९८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें अट्ठानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ९८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)