श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 98: भरत के द्वारा श्रीराम के आश्रम की खोज का प्रबन्ध तथा उन्हें आश्रम का दर्शन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.98.17 
तं दृष्ट्वा भरत: श्रीमान् मुमोद सहबान्धव:।
अत्र राम इति ज्ञात्वा गत: पारमिवाम्भस:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस भव्यताको देखकर श्रीभरत और उनके भाई शत्रुघ्न अत्यन्त प्रसन्न हुए और 'रामजी यहाँ हैं' यह जानकर उन्हें ऐसा संतोष हुआ जैसे विशाल सागर पार कर लिया हो॥17॥
 
On seeing that pomp, Sri Bharata and his brother Shatrughna became very happy and on knowing that 'Rama is here', they got the satisfaction like having crossed a vast ocean.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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