श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 98: भरत के द्वारा श्रीराम के आश्रम की खोज का प्रबन्ध तथा उन्हें आश्रम का दर्शन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.98.16 
स गिरेश्चित्रकूटस्य सालमारुह्य सत्वरम्।
रामाश्रमगतस्याग्नेर्ददर्श ध्वजमुच्छ्रितम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
आगे जाकर वह बड़ी तेजी से चित्रकूट पर्वत पर एक साल के वृक्ष पर चढ़ गया और वहाँ से उसने श्री रामचन्द्रजी के आश्रम में जल रही अग्नि से उठते हुए धुएँ को देखा॥16॥
 
Going further, he very quickly climbed a sal tree on the Chitrakoot mountain and from there he saw the smoke rising from the fire burning at the ashram of Shri Ramchandraji.॥ 16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas