श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 98: भरत के द्वारा श्रीराम के आश्रम की खोज का प्रबन्ध तथा उन्हें आश्रम का दर्शन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.98.15 
स तानि द्रुमजालानि जातानि गिरिसानुषु।
पुष्पिताग्राणि मध्येन जगाम वदतां वर:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वक्ताओं में श्रेष्ठ भरत पर्वत शिखरों पर उगे हुए वृक्षों के समूहों के बीच से निकले, जिनकी शाखाओं के सिरे फूलों से भरे हुए थे ॥15॥
 
Bharata, the best of speakers, emerged from among the clusters of trees that grew on the mountain peaks and the tips of their branches were filled with flowers. ॥15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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