श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 98: भरत के द्वारा श्रीराम के आश्रम की खोज का प्रबन्ध तथा उन्हें आश्रम का दर्शन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.98.11 
कृतकृत्या महाभागा वैदेही जनकात्मजा।
भर्तारं सागरान्ताया: पृथिव्या यानुगच्छति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'जो पृथ्वी के स्वामी श्री रामचन्द्रजी का समुद्र पर्यन्त पालन करती हैं, वे जनककिशोरी विदेहराजनन्दिनी महाभागा सीता अपने इस पुण्यकर्म में सफल हुईं॥11॥
 
'The one who follows her husband Shri Ramchandraji, the lord of the earth, till the sea, Janakakishori Videharajanandini Mahabhaga Sita became successful in this good deed of hers. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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