श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 98: भरत के द्वारा श्रीराम के आश्रम की खोज का प्रबन्ध तथा उन्हें आश्रम का दर्शन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.98.10 
यावन्न राज्ये राज्यार्ह: पितृपैतामहे स्थित:।
अभिषिक्तो जलक्लिन्नो न मे शान्तिर्भविष्यति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
'जब तक राज्य के सच्चे शासक आर्य श्री राम अपने पूर्वजों के राज्य पर प्रतिष्ठित होकर अभिषेक के जल से सिक्त नहीं हो जाते, तब तक मेरे मन को शांति नहीं मिलेगी ॥10॥
 
'Until the true ruler of the kingdom, Arya Shri Ram, is established over the kingdom of his forefathers and is moistened with the water of consecration, my mind will not find peace. 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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