Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.97.31: धर्म को ध्यान में रखते हुए, बुद्धिमान भरत अभिमान त्यागकर भगवान राम को प्रसन्न करने के लिए रघुवंशियों की सेना को साथ लेकर चित्रकूट पर्वत के निकट अत्यंत शोभा पा रहे थे। | ramayan सर्ग 2.97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्म को ध्यान में रखते हुए, बुद्धिमान भरत अभिमान त्यागकर भगवान राम को प्रसन्न करने के लिए रघुवंशियों की सेना को साथ लेकर चित्रकूट पर्वत के निकट अत्यंत शोभा पा रहे थे।
Keeping Dharma in mind, the wise Bharata, abandoning pride and bringing with him the army of Raghuvanshi to please Lord Rama, was looking very beautiful near the Chitrakoot mountain.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे सप्तनवतितम: सर्ग:॥ ९७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें सत्तानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ९७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥