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ramayan 2.97.12: ‘माता कैकेयी पर क्रोधित होकर, उन्हें कठोर वचन कहकर और पिता को प्रसन्न करके श्रीमान् भरत मुझे राज्य देने के लिए आये हैं।॥12॥   |   ramayan सर्ग 2.97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 97: श्रीराम का लक्ष्मण के रोष को शान्त करके भरत के सद्भाव का वर्णन करना,लक्ष्मण का लज्जित होना और भरत की सेना का पर्वत के नीचे छावनी डालना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.97.12 
अम्बां च केकयीं रुष्य भरतश्चाप्रियं वदन्।
प्रसाद्य पितरं श्रीमान् राज्यं मे दातुमागत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘माता कैकेयी पर क्रोधित होकर, उन्हें कठोर वचन कहकर और पिता को प्रसन्न करके श्रीमान् भरत मुझे राज्य देने के लिए आये हैं।॥12॥
 
‘After being angry with mother Kaikeyi, speaking harsh words to her and pleasing father, Shriman Bharat has come to give me the kingdom.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)