Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.96.4: इतने में ही सेना के महान कोलाहल से भयभीत और व्याकुल होकर बहुत से पागल हाथी-सेनापति अपने-अपने झुंडों सहित सब दिशाओं में भागने लगे ॥4॥   |   ramayan सर्ग 2.96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.96.4 
एतस्मिन्नन्तरे त्रस्ता: शब्देन महता तत:।
अर्दिता यूथपा मत्ता: सयूथाद् दुद्रुवुर्दिश:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इतने में ही सेना के महान कोलाहल से भयभीत और व्याकुल होकर बहुत से पागल हाथी-सेनापति अपने-अपने झुंडों सहित सब दिशाओं में भागने लगे ॥4॥
 
Meanwhile, frightened and distressed by the great noise of the army, many mad captains of elephants, along with their herds, began fleeing in all directions. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)