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ramayan 2.96.30: इस महान वन में सेना सहित भरत को मारकर मैं अपने धनुष-बाण का ऋण चुकाऊँगा - इसमें संशय नहीं है।   |   ramayan सर्ग 2.96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.96.30 
शराणां धनुषश्चाहमनृणोऽस्मिन् महावने।
ससैन्यं भरतं हत्वा भविष्यामि न संशय:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इस महान वन में सेना सहित भरत को मारकर मैं अपने धनुष-बाण का ऋण चुकाऊँगा - इसमें संशय नहीं है।
 
"By killing Bharata along with his army in this great forest I shall repay the debt of my bow and arrow - there is no doubt about this."
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे षण्णवतितम: सर्ग॥ ९६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें छियानबेवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ९६॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)