Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.96.29-30h: 'जिन हाथियों और घोड़ों के हृदय मेरे बाणों से छिद गए थे, तथा जिन मनुष्यों को मैंने मार डाला था, उन्हें सियार आदि मांसाहारी पशु इधर-उधर घसीटते फिर रहे थे।' 29 1/2 | ramayan सर्ग 2.96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'जिन हाथियों और घोड़ों के हृदय मेरे बाणों से छिद गए थे, तथा जिन मनुष्यों को मैंने मार डाला था, उन्हें सियार आदि मांसाहारी पशु इधर-उधर घसीटते फिर रहे थे।' 29 1/2
‘The elephants and horses whose hearts were pierced by my arrows, as well as the men killed by me, were dragged here and there by carnivorous animals such as jackals. 29 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥