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ramayan 2.96.28-29h: 'मैं अपने तीखे बाणों से शत्रुओं के शरीरों को टुकड़े-टुकड़े करके चित्रकूट के इस वन को तुरंत ही रक्त से सींच दूँगा।॥28 1/2॥   |   ramayan सर्ग 2.96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  2.96.28-29h 
अद्यैव चित्रकूटस्य काननं निशितै: शरै:॥ २८॥
छिन्दन् शत्रुशरीराणि करिष्ये शोणितोक्षितम्।
 
 
अनुवाद
'मैं अपने तीखे बाणों से शत्रुओं के शरीरों को टुकड़े-टुकड़े करके चित्रकूट के इस वन को तुरंत ही रक्त से सींच दूँगा।॥28 1/2॥
 
'I will immediately irrigate this forest of Chitrakoot with blood after tearing the bodies of my enemies into pieces with my sharp arrows.॥ 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)