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ramayan 2.96.26-27h: 'मैं कैकेयी को उसके बन्धु-बान्धवों सहित मार डालूँगा। आज यह पृथ्वी कैकेयी के महापाप से मुक्त हो जाए।॥26 1/2॥   |   ramayan सर्ग 2.96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  2.96.26-27h 
कैकेयीं च वधिष्यामि सानुबन्धां सबान्धवाम्॥ २६॥
कलुषेणाद्य महता मेदिनी परिमुच्यताम्।
 
 
अनुवाद
'मैं कैकेयी को उसके बन्धु-बान्धवों सहित मार डालूँगा। आज यह पृथ्वी कैकेयी के महापाप से मुक्त हो जाए।॥26 1/2॥
 
'I will kill Kaikeyi along with her relatives and friends. Today, this earth should be freed from the great sin of Kaikeyi.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)