Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.96.23: 'वीर रघुनाथजी! यह भरत हमारा शत्रु है और हमारे सामने आया है; अतः इसका वध होना उचित है। मैं भरत को मारने में कोई दोष नहीं देखता॥ 23॥ | ramayan सर्ग 2.96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'वीर रघुनाथजी! यह भरत हमारा शत्रु है और हमारे सामने आया है; अतः इसका वध होना उचित है। मैं भरत को मारने में कोई दोष नहीं देखता॥ 23॥
'Valiant Raghunathji! This Bharat is our enemy and has come in front of us; hence he deserves to be killed. I do not see any fault in killing Bharat.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥