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ramayan 2.96.16: रामजी की यह बात सुनकर क्रोध से जलते हुए लक्ष्मण ने अग्निदेव की भाँति सेना की ओर देखा, मानो उसे जलाकर भस्म कर देना चाहते हों और इस प्रकार बोले-॥16॥   |   ramayan सर्ग 2.96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 96: लक्ष्मण का शाल-वृक्ष पर चढ़कर भरत की सेना को देखना और उनके प्रति अपना रोषपूर्ण उद्गार प्रकट करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.96.16 
एवमुक्तस्तु रामेण लक्ष्मणो वाक्यमब्रवीत्।
दिधक्षन्निव तां सेनां रुषित: पावको यथा॥ १६॥
 
 
अनुवाद
रामजी की यह बात सुनकर क्रोध से जलते हुए लक्ष्मण ने अग्निदेव की भाँति सेना की ओर देखा, मानो उसे जलाकर भस्म कर देना चाहते हों और इस प्रकार बोले-॥16॥
 
On hearing Rama say this, Lakshmana, inflamed with anger, looked at the army like the god of fire, as if he wanted to burn it to ashes and spoke thus -॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)