श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता के प्रति मन्दाकिनी नदी की शोभा का वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.95.5 
मृगयूथनिपीतानि कलुषाम्भांसि साम्प्रतम्।
तीर्थानि रमणीयानि रतिं संजनयन्ति मे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'यद्यपि हिरणों के झुंड ने यहाँ का जल पीकर उसे प्रदूषित कर दिया है, फिर भी इसके सुन्दर घाट मेरे मन को बहुत प्रसन्नता दे रहे हैं।
 
'Although the herds of deer have polluted the water here by drinking it, yet its beautiful ghats are giving great pleasure to my mind. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)