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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 95: श्रीराम का सीता के प्रति मन्दाकिनी नदी की शोभा का वर्णन
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श्लोक 4
श्लोक
2.95.4
नानाविधैस्तीररुहैर्वृतां पुष्पफलद्रुमै:।
राजन्तीं राजराजस्य नलिनीमिव सर्वत:॥ ४॥
अनुवाद
'फलों और फूलों से लदे हुए नाना प्रकार के वृक्षों से घिरी हुई यह मंदाकिनी कुबेर के सुगन्धित सरोवर के समान सब ओर से शोभायमान प्रतीत होती है।॥4॥
'Surrounded by various trees laden with fruits and flowers, this Mandakini appears beautiful on all sides like the fragrant lake of Kubera. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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