श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 95: श्रीराम का सीता के प्रति मन्दाकिनी नदी की शोभा का वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.95.11 
पश्यैतद्वल्गुवचसो रथाङ्गाह्वयना द्विजा:।
अधिरोहन्ति कल्याणि निष्कूजन्त: शुभा गिर:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'कल्याणी! इन मधुरभाषी चक्रवाक पक्षियों को देखो, जो नदी के तट पर आकर सुन्दर कलरव कर रहे हैं।॥11॥
 
'Kalyani! Just look at these sweet-talking Chakravaka birds, chirping beautifully as they arrive on the banks of the river.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)