श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 94: श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  2.94.5-6 
केचिद् रजतसंकाशा: केचित् क्षतजसंनिभा:।
पीतमाञ्जिष्ठवर्णाश्च केचिन्मणिवरप्रभा:॥ ५॥
पुष्पार्ककेतकाभाश्च केचिज्ज्योतीरसप्रभा:।
विराजन्तेऽचलेन्द्रस्य देशा धातुविभूषिता:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'विविध धातुओं से विभूषित, निर्मल पर्वतों के राजा चित्रकूट के क्षेत्र कितने सुन्दर हैं! उनमें से कुछ चाँदी के समान चमकते हैं। कुछ रक्त के समान लाल आभा बिखेरते हैं। कुछ क्षेत्रों का रंग पीला और मंजिष्ठा है। कुछ उत्तम रत्नों के समान चमकते हैं। कुछ पुखराज के समान हैं, कुछ स्फटिक के समान हैं, कुछ केवड़े के पुष्प के समान चमकते हैं और कुछ क्षेत्र तारों और पारे के समान चमकते हैं।॥ 5-6॥
 
‘How beautiful do the regions of Chitrakoot, the king of the immaculates, look, adorned with various metals! Some of them shine like silver. Some radiate a red glow of blood. The colours of some regions are yellow and of a manjishta hue. Some shine like the best gems. Some are like topaz, some like crystals and some have the lustre of the kevada flower and some regions shine like stars and mercury.॥ 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)