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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 94: श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.94.4 
पश्येममचलं भद्रे नानाद्विजगणायुतम्।
शिखरै: खमिवोद्विद्धैर्धातुमद्भिर्विभूषितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
कल्याणी! इस पर्वत को देखो, यहाँ नाना प्रकार के असंख्य पक्षी कलरव कर रहे हैं। नाना प्रकार की धातुओं से अलंकृत इसके गगनचुम्बी शिखर आकाश को भेदते हुए प्रतीत होते हैं। इन शिखरों से सुशोभित चित्रकूट कितना सुन्दर है!॥4॥
 
‘Kalyani! Look at this mountain, innumerable birds of various kinds are chirping here. Its sky-high peaks adorned with various kinds of metals seem to be piercing the sky. How beautiful is Chitrakoot adorned with these peaks!॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)