श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 94: श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.94.23 
भित्त्वेव वसुधां भाति चित्रकूट: समुत्थित:।
चित्रकूटस्य कूटोऽयं दृश्यते सर्वत: शुभ:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा प्रतीत होता है मानो यह चित्रकूट पर्वत पृथ्वी को फाड़कर ऊपर उठ आया है। चित्रकूट का यह शिखर सब ओर से सुन्दर दिखाई देता है॥23॥
 
‘It seems as if this Chitrakoot mountain has risen up by tearing the earth. This peak of Chitrakoot looks beautiful from all sides.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)