श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 94: श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.94.21 
निशि भान्त्यचलेन्द्रस्य हुताशनशिखा इव।
ओषध्य: स्वप्रभालक्ष्म्या भ्राजमाना: सहस्रश:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'रात के समय इस पर्वत की चोटी पर लगी हजारों औषधीय जड़ी-बूटियां आग की लपटों की तरह चमकती हैं।
 
‘At night, thousands of medicinal herbs planted on this mountaintop shine with their radiance like flames of fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)