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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 94: श्रीराम का सीता को चित्रकूट की शोभा दिखाना
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श्लोक 20
श्लोक
2.94.20
शिला: शैलस्य शोभन्ते विशाला: शतशोऽभित:।
बहुला बहुलैर्वर्णैर्नीलपीतसितारुणै:॥ २०॥
अनुवाद
इस पर्वत के चारों ओर सैकड़ों विशाल शिलाएँ सुशोभित हैं, जो नीले, पीले, श्वेत और लाल आदि विविध रंगों की दिखाई देती हैं॥ 20॥
‘All around this mountain are adorned with hundreds of huge rocks, which appear in various colours like blue, yellow, white and red etc.॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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