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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 93: सेना सहित भरत की चित्रकूट-यात्रा का वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.93.7 
यादृशं लक्ष्यते रूपं यथा चैव मया श्रुतम्।
व्यक्तं प्राप्ता: स्म तं देशं भरद्वाजो यमब्रवीत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'ब्राह्मण! मैंने जो कुछ सुना है और इस देश का जो स्वरूप देख रहा हूँ, उससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि हम उसी देश में पहुँच गये हैं, जहाँ पहुँचने का आदेश भारद्वाजजी ने दिया था।
 
'Brahmin! From what I had heard and the appearance of this country that I see, it seems clear that we have reached the country where Bharadwajji had ordered us to reach. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)