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ramayan 2.91.9: 'मैं यहां अकेला आया हूं ताकि वे आश्रम के पेड़ों, पानी, जमीन और पत्ते को नुकसान न पहुंचाएं।'   |   ramayan सर्ग 2.91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.91.9 
ते वृक्षानुदकं भूमिमाश्रमेषूटजांस्तथा।
न हिंस्युरिति तेनाहमेक एवागतस्तत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'मैं यहां अकेला आया हूं ताकि वे आश्रम के पेड़ों, पानी, जमीन और पत्ते को नुकसान न पहुंचाएं।'
 
'I have come here alone so that they do not harm the trees, water, land and foliage of the ashram.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)