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ramayan 2.91.80: महर्षि भरद्वाज ने भरत और उनकी सेना का जो अवर्णनीय आतिथ्य किया, वह अद्भुत और स्वप्न के समान था। उसे देखकर वे सब लोग आश्चर्यचकित हो गए ॥80॥   |   ramayan सर्ग 2.91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  2.91.80 
व्यस्मयन्त मनुष्यास्ते स्वप्नकल्पं तदद्भुतम्।
दृष्ट्वाऽऽतिथ्यं कृतं तादृग् भरतस्य महर्षिणा॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
महर्षि भरद्वाज ने भरत और उनकी सेना का जो अवर्णनीय आतिथ्य किया, वह अद्भुत और स्वप्न के समान था। उसे देखकर वे सब लोग आश्चर्यचकित हो गए ॥80॥
 
The indescribable hospitality extended to Bharata and his army by Maharishi Bharadwaj was wonderful and like a dream. Seeing it all those people were astonished. ॥ 80॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)