श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.91.38 
तत्र राजासनं दिव्यं व्यजनं छत्रमेव च।
भरतो मन्त्रिभि: सार्धमभ्यवर्तत राजवत्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
उस महल में भरत ने दिव्य सिंहासन, पंखा और छत्र देखा और वहाँ राजा राम का स्मरण करते हुए अपने मंत्रियों के साथ उन सभी राजसी वस्तुओं की परिक्रमा की।
 
In that palace Bharata saw the divine throne, fan and umbrella and there thinking of King Rama he circumambulated all those royal articles along with his ministers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)