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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.91.29 
बभूव हि समा भूमि: समन्तात् पञ्चयोजनम्।
शाद्वलैर्बहुभिश्छन्ना नीलवैदूर्यसंनिभै:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
चारों ओर पाँच योजन की भूमि समतल हो गई, उस पर नीलम और लाजवन्त के समान भाँति-भाँति की घनी घासें फैली हुई थीं।
 
The land of five yojanas around became flat. On it, dense grass of various kinds was spreading like sapphire and lapis lazuli.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)