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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 91: भरद्वाज मुनि के द्वारा सेना सहित भरत का दिव्य सत्कार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.91.28 
तस्मिन्नेवंगते शब्दे दिव्ये श्रोत्रसुखे नृणाम्।
ददर्श भारतं सैन्यं विधानं विश्वकर्मण:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जब मनुष्यों के कानों को आनन्द देने वाली दिव्य ध्वनि उत्पन्न हो रही थी, तब भरत की सेना ने विश्वकर्मा की निर्माण कुशलता देखी।
 
While the divine sound was being produced, giving pleasure to the ears of men, Bharata's army witnessed the construction skill of Vishwakarma. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)