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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 90: भरत और भरद्वाज मुनि की भेंट एवं बातचीत तथा मुनि का अपने आश्रम पर ही ठहरने का आदेश देना
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श्लोक 9
श्लोक
2.90.9
तथेति तु प्रतिज्ञाय भरद्वाजो महायशा:।
भरतं प्रत्युवाचेदं राघवस्नेहबन्धनात्॥ ९॥
अनुवाद
सब कुशल है, ऐसा कहकर श्री रामजी के प्रति स्नेह के कारण महाबली भरद्वाज भरतजी से इस प्रकार बोले -॥9॥
Having said that all is well, the mighty Bharadwaj, due to his affection for Sri Rama spoke to Bharata thus -॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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