श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 90: भरत और भरद्वाज मुनि की भेंट एवं बातचीत तथा मुनि का अपने आश्रम पर ही ठहरने का आदेश देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.90.7 
अयोध्यायां बले कोशे मित्रेष्वपि च मन्त्रिषु।
जानन् दशरथं वृत्तं न राजानमुदाहरत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने अयोध्या, सेना, कोष, मित्रों और मंत्रिमंडल का हाल पूछा। वे राजा दशरथ की मृत्यु का वृत्तांत जानते थे; इसलिए उन्होंने उनके विषय में कुछ नहीं पूछा॥7॥
 
After this he asked about the condition of Ayodhya, army, treasury, friends and cabinet. He knew the story of King Dasharatha's death; That's why he didn't ask anything about them. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)