श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 90: भरत और भरद्वाज मुनि की भेंट एवं बातचीत तथा मुनि का अपने आश्रम पर ही ठहरने का आदेश देना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.90.19 
वसिष्ठादिभिर्ऋत्विग्भिर्याचितो भगवांस्तत:।
उवाच तं भरद्वाज: प्रसादाद् भरतं वच:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद वसिष्ठ आदि ऋत्विजों ने भी प्रार्थना की कि भरत ने कोई अपराध नहीं किया है। आप इनसे प्रसन्न हों। तब भगवान भारद्वाज प्रसन्न हुए और भरत से बोले-॥19॥
 
After this, Ritvijas like Vasistha etc also prayed that Bharat had not committed any crime. You should be happy with these. Then Lord Bhardwaj became pleased and said to Bharat -॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)