श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 90: भरत और भरद्वाज मुनि की भेंट एवं बातचीत तथा मुनि का अपने आश्रम पर ही ठहरने का आदेश देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.90.17 
अहं तु तं नरव्याघ्रमुपयात: प्रसादक:।
प्रतिनेतुमयोध्यायां पादौ चास्याभिवन्दितुम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'मैं उन सिंह-पुरुष श्री राम को प्रसन्न करके अयोध्या वापस लाने और उनके चरणों की पूजा करने जा रहा हूँ।॥17॥
 
'I am going to please that lion-man Shri Ram and bring him back to Ayodhya and to worship his feet.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)