श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 90: भरत और भरद्वाज मुनि की भेंट एवं बातचीत तथा मुनि का अपने आश्रम पर ही ठहरने का आदेश देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.90.14 
एवमुक्तो भरद्वाजं भरत: प्रत्युवाच ह।
पर्यश्रुनयनो दु:खाद् वाचा संसज्जमानया॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब भरद्वाजजी ने ऐसा कहा, तब भरतजी के नेत्रों में शोक के कारण आँसू भर आए। वे लड़खड़ाती हुई वाणी में उनसे इस प्रकार बोले -॥14॥
 
When Bharadwajji said this, Bharata's eyes welled up with tears due to grief. He spoke to him in a faltering voice as follows -॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)