श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 90: भरत और भरद्वाज मुनि की भेंट एवं बातचीत तथा मुनि का अपने आश्रम पर ही ठहरने का आदेश देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.90.10 
किमिहागमने कार्यं तव राज्यं प्रशासत:।
एतदाचक्ष्व सर्वं मे न हि मे शुध्यते मन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
आप तो राज्य कर रहे हैं न? आपको यहाँ आने की क्या आवश्यकता हुई? यह सब मुझे बताइए, क्योंकि आपके पास आने से मेरा मन शुद्ध नहीं हो रहा है—आप पर मेरा विश्वास नहीं टिकता॥ 10॥
 
‘You are ruling the kingdom, aren't you? Why did you feel the need to come here? Tell me all this, because my mind is not being purified by your side—my faith in you does not hold.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)