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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश
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श्लोक 8
श्लोक
2.9.8
श्रुत्वैवं वचनं तस्या मन्थरायास्तु कैकयी।
किंचिदुत्थाय शयनात् स्वास्तीर्णादिदमब्रवीत्॥ ८॥
अनुवाद
मन्थरा के ये वचन सुनकर कैकेयी सुन्दर बिछे हुए पलंग से थोड़ा उठकर उससे इस प्रकार बोलीं-॥8॥
On hearing these words of Manthra, Kaikeyi got up a little from the nicely spread bed and spoke to him thus -॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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