vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश
»
श्लोक 7
श्लोक
2.9.7
मयोच्यमानं यदि ते श्रोतुं छन्दो विलासिनि।
श्रूयतामभिधास्यामि श्रुत्वा चैतद् विधीयताम्॥ ७॥
अनुवाद
'विलासिनी! यदि तुम मुझसे इसे सुनने का आग्रह करती हो तो मैं तुम्हें बताता हूँ, इसे सुनो और उसके अनुसार आचरण करो।'॥7॥
'Vilasini! If you insist on hearing it from me then I will tell you, listen to it and act accordingly.'॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×