श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 58-59
 
 
श्लोक  2.9.58-59 
इह वा मां मृतां कुब्जे नृपायावेदयिष्यसि।
वनं तु राघवे प्राप्ते भरत: प्राप्स्यते क्षितिम्॥ ५८॥
सुवर्णेन न मे ह्यर्थो न रत्नैर्न च भोजनै:।
एष मे जीवितस्यान्तो रामो यद्यभिषिच्यते॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
'कुब्ज! मुझे सोने, रत्नों या किसी भी प्रकार के भोजन में कोई रुचि नहीं है। यदि श्री राम का राज्याभिषेक हो गया, तो मेरे जीवन का अंत हो जाएगा। अब या तो श्री राम के वन जाने पर भरत को इस पृथ्वी का राज्य मिलेगा या तुम यहाँ के राजा को मेरी मृत्यु का समाचार दोगे।'॥58-59॥
 
‘Kubje! I have no interest in gold, gems or any kind of food. If Shri Ram is crowned, it will be the end of my life. Now either Bharata will get the kingdom of this earth when Shri Ram goes to the forest or you will inform the king here about my death.’॥ 58-59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)