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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश
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श्लोक 52
श्लोक
2.9.52
तवापि कुब्जा: कुब्जाया: सर्वाभरणभूषिता:।
पादौ परिचरिष्यन्ति यथैव त्वं सदा मम॥ ५२॥
अनुवाद
'जिस प्रकार आप सदैव मेरे चरणों की सेवा करते हैं, उसी प्रकार अनेक कुबड़ी स्त्रियाँ भी समस्त आभूषणों से सुसज्जित होकर सदैव आपके चरणों की सेवा करेंगी।'
'Just as you always serve my feet, in the same way many hunchbacked women adorned with all the ornaments will always serve the feet of you too.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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