श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.9.32 
रामप्रव्राजनं चैव देवि याचस्व तं वरम्।
एवं सेत्स्यन्ति पुत्रस्य सर्वार्थास्तव कामिनि॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'देवी! आप राजा से श्री राम के लिए वनवास का वरदान मांगिए। हे कैकेयी, जो अपने पुत्र के लिए राज्य चाहती हैं! ऐसा करने से आपके पुत्र की सभी इच्छाएँ पूरी होंगी।'
 
‘Goddess! You must ask the king for the boon of exile for Shri Ram. O Kaikeyi who desires the kingdom for her son! By doing this, all the wishes of your son will be fulfilled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)