श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.9.27 
मणिमुक्तासुवर्णानि रत्नानि विविधानि च।
दद्याद् दशरथो राजा मा स्म तेषु मन: कृथा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'राजा दशरथ तुम्हें बहुमूल्य रत्न, मोती, सोना और अन्य अनेक बहुमूल्य रत्न देकर धोखा देने का प्रयत्न करेंगे, परन्तु तुम उनकी ओर ध्यान न देना॥ 27॥
 
'King Dasharatha will try to deceive you by giving you precious stones, pearls, gold and many other precious stones, but you should not pay any attention to them.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)