vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 9: कुब्जा के कुचक्र से कैकेयी का कोप भवन में प्रवेश
»
श्लोक 10
श्लोक
2.9.10
एवमुक्ता तदा देव्या मन्थरा पापदर्शिनी।
रामार्थमुपहिंसन्ती कैकेयीमिदमब्रवीत्॥ १०॥
अनुवाद
देवी कैकेयी की यह बात सुनकर पाप का मार्ग दिखाने वाली मन्थरा भगवान राम के स्वार्थ पर प्रहार करती हुई कैकेयी से इस प्रकार बोली-॥10॥
Upon hearing Goddess Kaikeyi say this, Manthra, who shows the path of sin, while attacking the selfishness of Lord Rama, spoke to Kaikeyi thus -॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×