श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 87: भरत की मूर्छा से गुह, शत्रुघ्न और माताओं का दुःखी होना, भरत का गुह से श्रीराम आदि के भोजन और शयन आदि के विषय में पूछना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.87.19 
ततस्तु जलशेषेण लक्ष्मणोऽप्यकरोत् तदा।
वाग्यतास्ते त्रय: संध्यां समुपासन्त संहिता:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
उनके पीने के बाद जो जल बचा, उसे लक्ष्मण ने पी लिया। (पीने से पहले) उन तीनों ने मौन होकर एकाग्रचित्त होकर संध्या उपासना की॥19॥
 
‘Lakshman drank the water left after they had drunk. (Before drinking) all three of them silently and with concentration performed Sandhya Upasana.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)