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सर्ग 86: निषादराज गुह के द्वारा लक्ष्मण के सद्भाव और विलाप का वर्णन
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श्लोक 9
श्लोक
2.86.9
एवमस्माभिरुक्तेन लक्ष्मणेन महात्मना।
अनुनीता वयं सर्वे धर्ममेवानुपश्यता॥ ९॥
अनुवाद
'जब हमने ऐसा कहा, तब धर्म पर सदैव दृष्टि रखने वाले महात्मा लक्ष्मण ने हम सबको समझाते हुए कहा -॥9॥
‘When we said this, the great soul Lakshmana, who always kept his eye on Dharma, said to all of us in a persuasive manner -॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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