श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 86: निषादराज गुह के द्वारा लक्ष्मण के सद्भाव और विलाप का वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.86.5 
नहि रामात् प्रियतरो ममास्ति भुवि कश्चन।
मोत्सुको भूर्ब्रवीम्येतदथ सत्यं तवाग्रत:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मैं तुमसे सत्य कहता हूँ कि इस पृथ्वी पर श्री राम से बढ़कर मेरा कोई प्रिय नहीं है; इसलिए तुम उनकी रक्षा के लिए चिन्ता मत करो॥5॥
 
'I tell you the truth that there is no one more dear to me than Shri Ram on this earth; therefore, do not be anxious to protect him.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)